दिल पतंग हुआ


चकोर से रंगीन काग़ज़ सा,
नन्हे हाथों में सहमा सा,
लकड़ी के ढ़ाचें से लिपटा,
कन्हि की ज़ोर पे,
आख़िर दिल पतंग हुआ मेरा |

छत की एक ओर पे रखा गया,
माँझे से, खिचता हुआ,
हवा के एक झोंके से,
खुलते आसमान से, जुड़ता हुआ,
आख़िर दिल पतंग हुआ मेरा |

छत छत से मैं,
अपने आप से मिलता हुआ, कटता हुआ,
बेह चला बेफिकर
किसी और की जीत से,
आख़िर दिल पतंग हुआ मेरा |

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